मारांग बुरु धोरोम गाढ़ महासम्मेलन 2026 को लेकर असम में प्रथम तैयारी बैठक सम्पन्न
गोवाहाटी, असम | 20 सितंबर 2026
आज दिनांक 20 सितंबर 2026, रविवार को साहित्य सभा भवन, गोवाहाटी, असम में आगामी 4 एवं 5 नवंबर 2026 को झारखंड राज्य के गिरिडीह जिला स्थित मधुबन में आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था की अगुवाई में मारांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में आयोजित होने वाले दो दिवसीय मारांग बुरु धोरोम गाढ़ महासम्मेलन 2026 को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने हेतु असम राज्य स्तरीय प्रथम तैयारी बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता ऑल असम माझी मंडल के अध्यक्ष दिपेन मुर्मू ने की।
बैठक में बतौर मुख्य अतिथि मारांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा के महासचिव हिरालाल माझी ने मारांग बुरु के संबंध में चर्चा करते हुए कहा कि आदिकाल से आदिवासी संथाल समाज के लोग मारांग बुरु पारसनाथ की चोटी पर स्थित मारांग बुरु जुग जाहेरथान में पारंपरिक पूजा पद्धति के साथ फागुन माह के तीसरे दिन बाहा बोंगा करते आ रहे हैं। वहीं बैसाख पूर्णिमा पर आदिवासी समुदाय के लोग विशू शिकार पर्व मनाते हैं तथा तीन दिनों का सामाजिक-धार्मिक सम्मेलन आयोजित करते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह केवल उनका कथन नहीं है, बल्कि विभिन्न अदालतों द्वारा समय-समय पर आदिवासी समाज के पक्ष में दिए गए निर्णयों की सत्यता है।
वर्तमान में जैन समुदाय द्वारा सरकार और माननीय अदालत को दिग्भ्रमित कर मारांग बुरु पारसनाथ पहाड़ को सम्मेद शिखर बनवाया गया है तथा पूरे पहाड़ पर वन कानून का उल्लंघन करते हुए अतिक्रमणकारी मालिकाना अधिकार का दावा किया जा रहा है, जो बिल्कुल गलत है।
उन्होंने कहा कि पारसनाथ मौजा के सभी गांव आदिवासी संथाल समाज के हैं। सभी गांवों में आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था संचालित है तथा जाहेरथान और माझीथान मौजूद हैं। इसके बावजूद न्यायालय द्वारा जैन समुदाय के पक्ष में एकतरफा फैसला किया जाना आदिवासियों के अस्तित्व, पहचान और धार्मिक धरोहर को समाप्त करने की साजिश है।
उन्होंने कहा कि जैन समुदाय के नागा साधु धर्मगुरु मारांग बुरु पारसनाथ घूमने आए थे और वहीं उनकी मृत्यु हो गई, जिसके बाद वहां मठ-मंदिर बनाया गया। अब तक पहाड़ पर अतिक्रमण कर 50 से अधिक मठ-मंदिर बनाए गए हैं तथा पूरे पहाड़ पर ढलाई कर सीढ़ियों एवं चबूतरों का निर्माण किया गया है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जैन समुदाय बताए कि पहाड़ पर अतिक्रमण किसने किया है, वन कानून का उल्लंघन किसने किया है, पहाड़ की संरचना को किसने बदला है और मारांग बुरु पारसनाथ पहाड़ से पेड़ों को काटकर किसने नष्ट किया है। यह सबको पता है।
उन्होंने कहा कि आदिवासियों ने कभी किसी की गुलामी स्वीकार नहीं की है। जिसने आदिवासियों को छेड़ा है, आदिवासियों ने सीधा विद्रोह किया है। आज भी इन अतिक्रमणकारियों के खिलाफ विद्रोह का उलगुलान-हूल का आगाज हो चुका है।
उन्होंने बताया कि आगामी 4 एवं 5 नवंबर 2026 को गिरिडीह जिला स्थित मधुबन में मारांग बुरु धोरोम गाढ़ महासम्मेलन का आयोजन किया गया है। सम्मेलन के दूसरे दिन दोपहर 1 बजे से आम सभा आयोजित कर सम्मेलन का समापन किया जाएगा। उन्होंने सभी लोगों से पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर मारांग बुरु पारसनाथ को बचाने में अपना योगदान देने का आह्वान किया।
बैठक में उपस्थित प्रमुख सदस्य
बैठक में मुख्य रूप से केन्द्रीय कोषाध्यक्ष सोमय टुडू, केंद्रीय प्रवक्ता दुर्गा चरन मुर्मू, नवीन मुर्मू, बिंदे सोरेन, असम परगना प्रत्येकराम किस्कू, माझी मंडल सचिव देवनाथ टुडू, सुधीर किस्कू, मिंटू टुडू, विश्वनाथ किस्कू, गोपीनाथ मार्डी, पानिराम माझी, प्रवीण चंद्र हांसदा, पुरन मुर्मू, मिंटू हेंब्रोम, महाबीर बास्के, बुधनाथ किस्कू, देबेन मार्डी, बाबुल मुर्मू, अशोक मुर्मू, फागुराम मार्डी, कुर्बेश्वर मार्डी, कानू मुर्मू आदि सहित काफी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।
मारांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा असम प्रदेश कमिटी गठित
बैठक के दौरान मारांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा असम प्रदेश कमिटी का गठन किया गया।
अध्यक्ष: दिपेन मुर्मू
महासचिव: महावीर बास्के
कोषाध्यक्ष: बिकुल हांसदा
प्रवक्ता: सोपान हेंब्रोम
सलाहकार:
- पूर्व स्पीकर माननीय पृथ्वी माझी
- पोनोत पारगना प्रत्येकराम किस्कू
- मिंटू हेंब्रोम
- कानू मुर्मू
- कुर्बेश्वर मार्डी
इसके साथ ही पचास सदस्यों को एग्जीक्यूटिव मेंबर रखा गया।
धन्यवाद।
भवदीय
दुर्गा चरन मुर्मू
केन्द्रीय प्रवक्ता
मारांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा





