आज दिनांक 27 सितंबर 2026 रविवार को स्थान प्रो. फाल्गुनी यादव कोलेज, चकाई, जामुई बिहार में आगामी दिनांक 4 एवं 5 नवंबर 2026 को झारखंड राज्य के गिरिडीह जिला स्थित मधुबन में आदिवासी पारंपरिक स्वसाशन व्यवस्था के आगुवाई में मारांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में आयोजित दो दिवसीय मारांग बुरु धोरोम गाढ़ महासम्मेलन 2026 के ऐतिहासिक सफल बनाने हेतु बिहार राज्य स्तरीय प्रथम तैयारी एवं सामाजिक रिति रिवाज, पूजा पद्धति, धर्म ,भाषा संस्कृति को सुरक्षित संरक्षित करने हेतु चकाई पारगना बाबा भोला बास्के के अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ।
बैठक में उपस्थित बतौर मुख्य अतिथि मारांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष फागु बेसरा जी ने मारांग बुरु पर चर्चा करते हुए कहा कि आदिकाल से आदिवासी संथाल समाज के लोग मारांग बुरु पारसनाथ के चोटी पर स्थित मारांग बुरु जुग जाहेरथान में पारंपरिक पूजा पद्धति के साथ फागुन माह के तिसरे दिन पर बाहा बोंगा करते आ रहे हैं और बाईसाख पूर्णिमा पर आदिवासी समुदाय के लोग विशू शिकार पर्व मनाते हैं एवं तिन दिनों का समाजिक धार्मिक सम्मेलन आयोजित किया जाता रहा है।यह हम नहीं कह रहे हैं विभिन्न अदालतों द्वारा समय समय पर हमारे पक्ष में दिए गए जजमेंट की सत्यता है। वर्तमान में जैन समुदाय द्वारा सरकार और माननीय अदालत को दिग्भ्रमित कर मारांग बुरु पारसनाथ पहाड़ को सम्मेद शिखर बनवाया, और पुरे पहाड़ पर वन कानून का उल्लंघन करने वाले अतिक्रमणकारी मालिकाना अधिकार का दावा कर रहे हैं। जो बिल्कुल ग़लत है। पारसनाथ मौजा में सभी गांव आदिवासी संथाल समाज का है, सभी गांवों में आदिवासी पारंपरिक स्वसाशन व्यवस्था संचालित है, जाहेरथान, माझीथान मौजूद है, फिर भी कोर्ट द्वारा जैन के पक्ष में एकतरफा फैसला करना आदिवासियों के अस्तित्व पहचान धार्मिक धरोहर को समाप्त करने कि साजिश है। जैन समुदाय के नागा साधु धर्म गुरु मारांग बुरु पारसनाथ घुमने आए थे और वहीं मर गया, तो वहां पर मठ मंदिर बनाया गया, अब तक पहाड़ पर अतिक्रमण कर 40 से अधिक मठ मंदिर और पुरे पहाड़ पर ढलाई कर सिढ़ी एवं चबुतरा का निर्माण किया गया है, जैन समुदाय बताए कि पहाड़ पर अतिक्रमण कौन किया है, वन कानून का उल्लंघन कौन किया है , पहाड़ के संरचना को कौन बदला, मारांग बुरु पारसनाथ पहाड़ से पेड़ों को काट कर कौन नष्ट किया। यह सबको पता है। आदिवासियों ने कभी किसी कि गुलामी स्वीकार नहीं किया जिसने आदिवासीयों को छेड़ा है आदिवासियों ने सिधा विद्रोह किया है। आज भी इन अतिक्रमणकारीयों के खिलाफ विद्रोह का उलगुलानहूल का आगाज हो चुका है। आगामी दिनांक 4-5 नवंबर 2026 को गिरिडीह जिला स्थित मधुबन में आयोजित मारांग बुरु धोरोमगाढ़ महासम्मेलन का आयोजन किया गया है, सभी लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हो कर मारांग बुरु पारसनाथ को बचाने में अपना योगदान दे।
विशिष्ट अतिथि के रुप में उपस्थित देश पारानिक बाबा दुर्गा चरन मुर्मू ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने समाज को संचालित करने के लिए हजारों वर्षों पहले लुगु बुरु घंटा बाड़े दोरबार चाटानी में संथाल समाज के लिए अलिखित संविधान रिति रिवाज, पूजा पद्धति, धर्म संस्कृति, न्याय प्रणाली का निर्माण किया गया है, पूर्वजों द्वारा समार्पित विधि विधान को न भूलें, इसे आत्मसात करते हुए व्यावहारिक जीवन में समाहित करें। पारंपरिक स्वसाशन व्यवस्था को सुदृढ़ करें, न्याय प्रणाली को मजबूती के साथ निस्वार्थ भाव से संचालित करें, समाज के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक रोजगार, व्यवस्यय में भागिदारी सुनिश्चित करें, नशा से दूर रहें समाज का सर्वांगीण विकास के लिए तन मन धन से दान और योगदान दें।
बैठक में मुख्य रूप से केन्द्रीय कोषाध्यक्ष सोमय टुडू, प्रवक्ता सुधीर बस्के, नवीन मुर्मू,केंद्रीय सदस्य बिंदे सोरेन, जयबीर हांसदा, मुनसी मारान्डी, डॉक्टर जगजिवन मुर्मू, कापीलदेव हेंम्ब्रोम, बाबुराम किस्कू, सोनामन हेंम्ब्रोम, जेठु मारांडी, सामिल सोरेन, संतोष सोरेन, राजेश मारांडी, मातलु हांसदा, मोतीलाल हांसदा, मोती हेंम्ब्रोम, राजेन्द्र हेंम्ब्रोम, नरेश हेंम्ब्रोम, सिदोनाथ सोरेन श्रिमति ममता हांसदा , रुपमनी मुर्मू, सरिता बास्के, संगिता हेंम्ब्रोम, कुसूम हेंम्ब्रोम, सोनाली हेंम्ब्रोम, रिशु हेंम्ब्रोम आदि काफी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।
मारांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा बिहार प्रदेश कमिटी गठित
अध्यक्ष , dr. जगजीवन मुर्मू
उपाध्यक्ष – राजेश मरांडी, बाबूराम किस्कू
महासचिव, सोनामन हेंम्ब्रोम,
सचिव – बुद्धदेव सोरेन
कोषाध्यक्ष, भोला बास्के
प्रवक्ता, किपिलदेव हेंम्ब्रोम
सलाहकार – मुंशी मारांडी, पृथ्वीराज हेमराम, शंकर हंसना तथा ग्यारह सदस्यों को एग्जीक्यूटिव मेम्बर रखा गया।
धन्यवाद।
भवदीय
दुर्गा चरन मुर्मू
केन्द्रीय प्रवक्ता, मारांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा
9304387067






